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अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी सीआईए के खौफनाक हैं टॉर्चर के तरीके

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इंटरनेशनल डेस्क.अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) की कमान पहली बार एक महिला के हाथों सौंपी गई है। अब इसका जिम्मा जीना हास्पेल उठाएंगी। सीआईए को दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी में से एक माना जाता है। एजेंसी आतंकवाद के आरोप में बंद कैदियों को 180 घंटे तक जगाने से लेकर उनके कपड़े उतरवाने तक उन्हें तरह-तरह से इन्टेरोगेट करती है। सीआईए की कैद से निकले कई कैदियों ने यहां के टॉर्चर के दर्दनाक तरीकों के बार में भी बताया था और कहा था कि हम हर दिन यहां से रिहाई की दुआ करते थे।

लीक हुई रिपोर्ट्स में सामने आ चुका है सच…

मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वॉच ने इसके इन्टेरोगेशन प्रोग्राम को क्रूर और गैर कानूनी बताया था। ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से जारी सीआईए मेमोज और इंटरनेशनल कमेट ऑफ रेड क्रॉस की लीक हुई रिपोर्ट्स में भी इनके तरीकों की सच्चाई सामने आ चुकी है। यहां हम इन्टेरोगेशन के कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जिसे सीआईए इस्तेमाल कर चुका है।

उतरवा दिए जाते कैदियों के कपड़े

सीआईए पूछताछ के लिए कैदियों के कपड़े तक उतरवा लेती है। हालांकि, 2005 में जस्टिस डिपार्टमेंट ने इसे लेकर सीआईए को एक मेमो जारी किया था और इसे लेकर आपत्ति जताई गई थी। इसमें लिखा गया था कि एक कैदी को नेकेड करने पर उसे आगे शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।

180 घंटे तक रखते हैं जगाकर
कैदियों को 48 घंटे से 180 घंटों तक जगाकर रखा जाता है और वो भी खड़ा करके। इसके लिए उन्हें अथॉरिटी हासिल है। उन्हें खड़ाकर हाथों को ऊपर उठाकर बांध दिया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीआईए ने अरसाला खान नाम के एक कैदी को ऐसे ही करीब 56 घंटे जगाकर रखा था। इसके अलावा सीआईए की कैद में रहे 14 कैदियों ने बताया था उन्हें सोने ही नहीं दिया जाता। इनमें से एक ने बताया कि जैसे ही हमें नींद आती वैसे ही एक गार्ड मेरे पास आता और मेरी आंखों पर पानी का स्प्रे कर जाता था

पिटाई करना और पेट पर घूंसे मारना
इसका जिक्र 2009 में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन को सरकार से मिले डॉक्युमेंट में किया गया है। इसमें पूछताछ के लिए पैरों से कैदी के पेट पर मारा जाता है और उसके एब्डॉमिनल पर घूंसे मारे जाते। सीआईए इस तरीके का इस्तेमाल 2004 से पहले करती थी, वो भी जस्टिस डिपार्टमेंट की मंजूरी लिए बिना इसे किया जाता था।

छोटे से बॉक्स में रखकर पूछताछ


कई बार कैदी को इन्टेरोगेशन के लिए एक छोटे से बॉक्स में डाल दिया जाता था, जिसमें उनके लिए हिलना भी मुश्किल होता था। कई बार 18 घंटे तक कैदी बक्से में पड़े रहते। बुश की सरकार के दौरान 2002 में अबु जुबायदाह को बारी-बारी ऐसे ही बॉक्स में रखा गया। अबु ने बताया था कि इसमें सांस लेना तक मुश्किल होता था। इन्टेरोगेटर के पास बॉक्स के अंदर नुकसान न पहुंचाने वाले इन्सेक्ट्स (कीड़े) डालने का भी ऑप्शन होता है। ये टेक्निक अबु जुबाएदाह पर इस्तेमाल की गई थी।




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