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मार्स रोवर के साथ मंगल पर पहली बार हेलिकॉप्टर भेजेगा नासा

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helicopter with Mars Rover

वॉशिंगटन. Mars Rover- नासा 2020 के अपने मंगल मिशन पर एक हेलिकॉप्टर भेजेगा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने शुक्रवार को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसका ऐलान किया। नासा के मुताबिक, आकार में सॉफ्टबॉल जितने और सिर्फ 1.8 किलोग्राम के इस ड्रोन जैसे दिखने वाला हेलिकॉप्टर के जरिए मंगल की ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाई जाएगी। बता दें कि हाल ही में नासा ने मंगल पर अपना स्पेसक्राफ्ट इनसाइट भेजा था। इनसाइट 6 महीने बाद 26 नवंबर को मंगल पर उतरेगा।

क्या होगी इनसाइट की खासियत?

– ‘द मार्स हेलिकॉप्टर’ नाम के इस डिवाइस का वजन 1.8 किलोग्राम से थोड़ा कम होगा। इसमें सिर्फ जहाज का ढांचा और कुछ मुख्य बॉडी पार्ट्स जोड़े जाएंगे।
– ड्रोन जैसे दिखने वाला मार्स हेलिकॉप्टर मंगल पर भेजा जाने वाला पहला ऐसा एयरक्राफ्ट होगा, जिसे हवा से भारी बनाया गया है। इसका आकार एक सॉफ्टबॉल जितना ही होगा।

– वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस हेलिकॉप्टर के पंख 3 हजार चक्कर प्रति मिनट के हिसाब से घूमेंगे। ये पृथ्वी के एक बड़े हेलिकॉप्टर से दस गुना तेज है।

2020 में रोवर के साथ भेजा जाएगा हेलिकॉप्टर
– द मार्स हेलिकॉप्टर को जुलाई 2020 के लिए निर्धारित मिशन के तहत एक रोवर के साथ भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि ये फरवरी 2021 को मंगल की सतह पर पहुंच कर काम करना शुरू कर देगा।

कैसे काम करेगा एयरक्राफ्ट?
– रोवर के लैंड करते ही ये हेलिकॉप्टर मंगल में उड़ान भरेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये एयरक्राफ्ट ग्रह पर जीवन की खोज करेगा, इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों और इंसान के जाने की संभावनाएं भी तलाशेगा।
– नासा में इस प्रोजेक्ट की मैनेजर मिमी ऑन्ग ने बताया कि मार्स हेलिकॉप्टर पृथ्वी से करीब 5.5 करोड़ किलोमीटर दूर उड़ेगा। इसमें फ्यूल के तौर पर सोलर सेल्स लगाए गए हैं, जो इसे लगातार चार्ज रखेंगे। ऑन्ग के मुताबिक, हेलिकॉप्टर बिना किसी रिमोट कंट्रोल के खुद ही ऑपरेट होगा।

नासा के सबसे हाई रिस्क प्रोजेक्ट में शामिल ये मिशन
– ऑन्ग ने बताया कि पृथ्वी और मंगल के वातावरण में काफी फर्क है। पृथ्वी में हेलिकॉप्टर अब तक ज्यादा से ज्यादा 40 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। लेकिन मंगल के हालात ऐसे हैं कि वहां जमीन पर ही पृथ्वी से 1 लाख फीट ऊंचाई जैसा वातावरण है।
– नासा ने एक स्टेटमेंट में बताया कि अगर ये मिशन काम नहीं करता तो 2020 के मिशन पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अगर ये काम करेगा तो आने वाले समय में स्पेस एजेंसियों के पास एयरक्राफ्ट भेजने के कई सारे साधन मौजूद होंगे।

पहले जमीन पर चलने वाले डिवाइस भेज चुका है नासा
– नासा इससे पहले जमीन पर चलने वाले डिवाइस ही भेजता रहा है। लेकिन इनमें बड़ी बाधाएं पार करना मुश्किल होता है। 2009 में नासा का स्पिरिट रोवर मंगल की रेत में फंस गया था। वैज्ञानिकों ने उसे निकालने की काफी कोशिश की, लेकिन आखिरकार स्पिरिट बंद हो गया।

धरती जैसा है मंगल

– मंगल ग्रह कई मामलों में पृथ्वी के समान है। दोनों ग्रह पर पहाड़ हैं। हालांकि पृथ्वी की तुलना में इसकी चौड़ाई आधी, भार एक तिहाई और घनत्व 30% से कम है।




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