Gobind Agriculture Kotkapura: 125 रुपए में नौकरी, आज 20 करोड़ हर सालGobind Agriculture Kotkapura: 125 रुपए में नौकरी, आज 20 करोड़ हर साल
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Gobind Agriculture Kotkapura

125 रुपए में शुरू की थी नौकरी, आज कमा रहा है 20 करोड़ हर साल

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सिख दंगों के दौरान कर दी थी बब्बू के पिता की हत्या

आज सुखविंदर Gobind Agriculture Kotkapura के संचालक

Kotkapura 4 नवंबर 2019 : Gobind Agriculture Kotkapura : 1984 के दिल्ली दंगों में अपने नाना के गांव Kotkapura से यूपी (UP) जाते समय सुखविंदर सिंह उर्फ़ बब्बू और उनके परिवार के सामने उनके पिता की हत्या कर दी थी लेकिन ट्रेन में साथ बैठी सवारियों की समझदारी से बब्बू को बचा लिया गया। बब्बू के पिता की मौत के बाद बब्बू UP के शहर Bajpur (Now in Utrakhand) ) से Business समेट अपनी माता, 6 बहनों और एक 2 वर्ष के छोटे भाई के साथ वापस Kotkapura लौट आए।

कोटकपूरा आकर 125 रुपए प्रति महीना पगार पर एक वर्कशाॅप पर नौकरी करने लगे। 30 साल के कड़े श्रम के बाद आज बब्बू की 20 करोड़ से अधिक की वार्षिक टर्नओवर का गोबिंद एग्रीकल्चर के नाम से कृषि मशीनरी उत्पाद की यूनिट है। उनकी बनाई कृषि मशीनरी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत करीब दर्जन भर भारतीय राज्यों के साथ पाकिस्तान में भी सप्लाई होती है।

परिवार का खर्चा चलाने के लिए बब्बू को पढ़ाई छोड़ नौकरी करनी पड़ी

सुखविंदर बब्बू बताते हैं कि पिता की मौत के बाद 1986 में बाजपूर से लौटकर कोटकपूरा आकर रहने लगे। माता जगजीत कौर को दंगा पीड़ित कोटे से पंजाब सरकार ने 600 रुपए प्रति महीना पगार पर सिविल अस्पताल में नौकरी दे दी। 6 बहनों व दो भाइयों के परिवार की गुजर बसर के लिए वह भी पढ़ाई छोड़ सवा सौ रुपए महीने की पगार पर मोगा रोड पर स्थित एक वर्कशाॅप में काम करने लगे। यहीं उन्होंने बेल्डिंग, गेट ग्रिल व लोहा सामान बनाने का काम सीखा।

7 वर्ष की नौकरी के दौरान उनकी पगार 600 तक पहुंच गई। लेकिन उनके दिल की इच्छा अपने दम पर कुछ बड़ा करने की थी। इसी इच्छा को मन में लिए 1994 में वर्कशाॅप का काम सीख उन्होंने कोटकपूरा के देवी वाला रोड पर अपने भाई हरविंदर सिंह बिट्टा के साथ अपनी वर्कशाॅप शुरू की। यहां उन्होंने छोटे मोटे कृषि औजार बनाने व इनकी रिपेयर का काम शुरू किया। इसी दौरान परिवार के पालन में अपनी मां का सहारा बन उन्होंने बहनों व भाई को पढ़ाया लिखाया व सभी छह बहनों की शादी की।

9 साल पहले शुरू किया था कारोबार

वर्ष 2010 में उन्होंने अपने भाई हरविंदर सिंह बिट्टा से मिलकर मोगा रोड पर गोबिंद एग्रीकल्चर वर्क्स के नाम से अपना कृषि मशीनरी बनाने का कारोबार शुरू किया। पिछले 10 वर्ष में दोनों भाइयों ने परिश्रम कर इसे करीब 20 करोड़ की टर्नओवर तक पहुंचाया। आज उनका नाम क्षेत्र के नामवर उद्योगपतियों में शुमार है।

समाजसेवा में भी आगे रहते हैं दोनों भाई

आज भी दोनों भाई अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा समाजसेवा के कार्य पर खर्च करते हैं व मोगा रोड पर निर्माणाधीन उनकी कोठी का ग्राउंड फ्लोर उन्होंने निराश्रित लोगों के आश्रय बनाने को समर्पित करने का संकल्प लिया है।

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