Mastuana Sahib मुद्दे पर बुरे फसते दिख रहे हैं ढींडसा पिता-पुत्र Mastuana Sahib मुद्दे पर बुरे फसते दिख रहे हैं ढींडसा पिता-पुत्र
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Mastuana Sahib

अब बुरे फसते दिख रहे हैं ढींडसा पिता-पुत्र

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मस्तुआना साहिब पर कब्ज़े का मुदा उठा

Sangrur 25 January 2020 : शिरोमणि अकाली दल से सुखदेव सिंह ढींडसा (Dhindsa) और परमिंदर सिंह ढींडसा के निलंबन के बाद, जिला संगरूर में अकाली नेताओं में अब एक और बात चल पड़ी है । सिख नेताओं का एक प्रति निधिमंडल, जत्थेदार परषोतम सिंह फग्गूवाला के नेतृत्व में, गुरुद्वारा कंबोवाल साहिब में पहुंचा और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष, भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल के एक मांग पत्र सौंप कर गुरुद्वारा मस्तुआना साहिब (Mastuana Sahib) को सुखदेव सिंह ढींडसा और परमिंदर ढींडसा के कब्ज़े से मुक्त करवाने की गुहार लगाई ।

जत्थे ने पहले गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश किया और भाई लोंगोवाल के कार्यालय के सामने सांकेतिक धरना देने के बाद हुई बैठक में उन्होंने ढींडसा से मस्तूना साहिब को आज़ाद करवाने की मांग की। उन्होंने दरबार साहिब का मामला भी उठाया। पत्रकारों से बात करते हुए जत्थेदार फग्गूवाला ने कहा कि शिरोमणि कमेटी को आजाद कराने की बात करने वाले ढींढसा को सबसे पहले खुद मस्तूना साहिब (Mastuana Sahib) को मुक्त करना होगा, जहां करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ढींडसा परिवार का शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति पर पूरा नियंत्रण था, जिसके चलते उनका इस संस्था पर कब्जा हो गया और आज हम इस अवसर पर शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष भाई लोंगोवाल को एक ज्ञापन देने आए हैं।

इस संस्थान को संत अतर सिंह जी ने शिक्षा के प्रचार के लिए स्थापित किया था और यह उनका सपना था कि ट्रस्ट में केवल गुरसिखों को शामिल किया जाएगा, लेकिन दुख की बात यह है कि संस्थान में एक भी गुरसिख ट्रस्टी नहीं है।

उन्होंने कहा कि बड़े बजट वाले इस संगठन की कोई जवाबदेही नहीं है। उन्होंने कहा कि मस्तुआना साहिब (Mastuana Sahib) में संत अतर सिंह ट्रस्ट और अकाल कॉलेज काउंसिल दो संस्थान हैं और दोनों के प्रमुख एक व्यक्ति नहीं हो सकते हैं, लेकिन सुखदेव सिंह ढींडसा दोनों की अध्यक्षता करते हैं। अब अपने बेटे परमिंदर ढींडसा को भी ट्रस्टी बना दिया है, जो नियमों के खिलाफ है।

उन्होंने दावा किया कि मस्तूआना साहिब (Mastuana Sahib) संस्थान का कोई हिसाब किताब नहीं है और 60 हजार रुपये का प्रसाद प्रतिदिन सड़क पर बेचा जाता है। जत्थेदार ने कहा कि 400 एकड़ संस्थान की जमीन का भी ढींडसा के कब्ज़े के चलते दुरुपयोग किया जा रहा है । उन्होंने यह भी कहा कि 2009 में भी उन्होंने ढींडसा से मस्तूना साहिब को छोड़ने की मांग की थी।

भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने कहा कि मांग पत्र के अनुसार, सुखदेव सिंह ढींडसा, जिन्होंने पिछले 40 वर्षों से इस स्थान पर कब्जा किया है, इस स्थान के साथ सिद्धांतहीन हो चुके हैं। यह स्थान पिता पुत्र के कब्ज़े वाले तानाशाही के दौर से गुजर रहा है। जिसके तहत ढींडसा ने अपने बेटे और रिश्तेदारों को इस ट्रस्ट का ट्रस्टी बनाया रखा है।अदालत में जो मामला विचाराधीन है उस पर बहस हो रही है और शिरोमणि कमेटी इस संबंध में पूरी ईमानदारी से अपना पक्ष रखेगी।

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