कोराना पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा वायरस के आगे इंसानी कोशिशें बौनी कोराना पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा वायरस के आगे इंसानी कोशिशें बौनी
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कोराना पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा वायरस के आगे इंसानी कोशिशें बौनी

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दुनिया में फैले कोरोना वायरस के कहर पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है । इस सम्बंधी जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि सौ साल में ऐसी महामारी फैलती है। हम इस वायरस से नहीं लड़ सकते। ऐसे वायरस के आगे इंसानी कोशिशें छोटी पड जाती हैं इनसे अपने स्तर पर लड़ने की जरूरत है। सरकार के स्तर पर इसका मुकाबला नहीं हो सकता । इक मौके जस्टिस एमआर शाह ने वरिष्ठ वकील अपने साथ सिर्फ एक वकील ही लाए। यह हमारे भले के लिए ही है।

कोरोनावायरस से संक्रमण हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसके खतरे को देखते हुए उद्योगपति और स्टार्ट अप्स कंपनियों के समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे कोरोनावायरस से निपटने के लिए इस हफ्ते प्रमुख शहरों में लॉकडाउन करें। उनका कहना है कि वायरस राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव नहीं करता। ठोस और आक्रामक कार्रवाई की जानी महत्वपूर्ण है। प्रमुख शहरों में दो हफ्तों के लिए धारा 144 और सख्त लॉकडाउन होना चाहिए । कहा गया है कि महामारी से बचाव के लिए रोकथाम के प्रयासों को जारी रखना चाहिए। इससे 30 दिनों के बाद पांच गुना मौतों को कम किया जा सकता है। इससे करीब दस हजार लोगों की जान बच सकती है।यह भी कहा गया है कि भारत ने इससे निपटने के लिए अच्छी शुरुआत की है। सरकार सार्वजनिक जगहों को बंद कर रही है। लोगों को भीड़ जुटाने से रोका जा रहा है। साथ ही कर्मचारियों को घर से ही काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसमें यह चेतावनी दी गई है सरकार को भोजन, दवा अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।




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